परिवहन व्यवस्था चरमराई, आम आदमी और स्कूली बच्चे परेशान

हिमाचल प्रदेश में ओवरलोडिंग के कारण हुए हादसे के बाद सरकार और पुलिस ने तो सख्त आदेश दे दिए कि ओवरलोडिंग करने वालों के शत प्रतिशत चालान किए जाए। लेकिन इस का खामियाजा अब आम आदमियों और खास कर स्कूली बच्चों को भुगतना पड़ रहा है। आज ज्यादातर स्कूली बच्चे पैदल स्कूल जाते और छुट्टी के बाद घर वापिस जाते दिखे। प्रदेश के लगभग सभी भागों में लोगों को बसों में जगह नही मिलने से भारी समस्यों का सामना करना पड़ा। आम आदमियों को मजबूरी में निजी वाहनों का प्रयोग करना पड़ा या फिर टैक्सीयों का सहारा लेना पड़ा।

सरकार आम आदमियों को उचित परिवहन की सुविधा उपलब्ध करवाने में बुरी तरह असफल रही। जबकि सैकड़ों बसे जगह जगह बेकार खड़ी खड़ी सड़ रही है। परिवहन मंत्री ने तो नई 200 बसे खरीदने का एलान की कर दिया। लेकिन उनको यह याद नही आया कि कुल्लू में अभी तक 360 बसे बेकार खड़ी है। अगर यही हालात रहे तो लगता है कि या तो प्रदेश की जनता को पैदल चलने की आदत डालनी पड़ेगी या फिर अपनी जेबे ढीली करनी पड़ेगी।

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