US रिपोर्ट-भारत 2018 अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता

अमेरिका के विदेश विभाग की ओर से जारी रिपोर्ट “भारत 2018 अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता” में कहा गया है कि भारत में अल्पसंख्यक समुदायों के खिलाफ, खासतौर पर मुस्लिमों पर हिंसक चरमपंथी हिंदू समूहों द्वारा भीड़ के हमले 2018 में भी जारी रहे। साथ ही रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकार धार्मिक अल्पसंख्यकों, हाशिए के समुदायों और सरकार के आलोचकों पर भीड़ के हमलों पर कार्रवाई करने में विफल रही। हालांकि भारत ने इसे सिरे से खारिज किया है।

रिपोर्ट का शीर्षक है- भारत 2018 अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता, जिसमें कहा गया है कि सरकार कभी-कभी धार्मिक अल्पसंख्यकों, हाशिए के समुदायों और सरकार के आलोचकों पर भीड़ के हमलों पर कार्रवाई करने में विफल रही। रिपोर्ट में कहा गया, ‘भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कुछ वरिष्ठ नेताओं ने अल्पसंख्यक समुदायों के खिलाफ भड़काऊ भाषण दिए। देश में कम से कम 24 राज्य में गो वध पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध हैं।’

रिपोर्ट में कहा गया है, ‘प्रतिबंध ज्यादातर मुसलमानों और अन्य अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के सदस्यों को प्रभावित करता है। 24 राज्यों में से अधिकांश में जहां गो वध पर प्रतिबंध है, दंड में छह महीने से दो साल तक कारावास और 1,000 से 10,000 रुपए का जुर्माना शामिल है।’

भारत में सांप्रदायिक घटनाओं में 9 फीसदी की वृद्धि 

जनवरी 2018 से लेकर दिसंबर 2018 में भारत में घटित विभिन्न उन्मादों पर संस्था का कहना है कि 2018 में भारत में धार्मिक स्वतंत्रता की स्थितियां निरंतर खराब हुई है. इसमें मौजूदा मोदी सरकार को कटघरे में खड़ा करते हुए लिखा है कि धार्मिक स्वतंत्रता का यह इतिहास रखने वाले भारत में हाल के वर्षों में अल्पसंख्यकों के खिलाफ उपद्रव को प्रोत्साहन दिया गया है जिसमें सरकारी सहमति भी शामिल है. यही नहीं रिपोर्ट में यह भी लिखा गया है कि गैर- हिंदू और निम्न जाति के हिंदू अल्पसंख्यकों के खिलाफ धमकी, उत्पीड़न भरे हिंसा को बढ़ावा दिया है.

रिपोर्ट में चौंकाने वाली बातें भी कहीं गई हैं. आईआरएफए की रिपोर्ट में कहा गया है कि धार्मिक स्वतंत्रता के बार बार उल्लघंन करने के मामलों को देखते हुए भारत को टीयर 2 में रखा गया है. रिपोर्ट में 2018 में एक तिहाई राज्य सरकारों ने गैर हिंदुओं और दलितों के खिलाफ भेदभावपूर्ण और गोहत्या विरोधी कानूनों का भी हवाला दिया है. यही नहीं मुस्लिमों की हत्या और दलितों के साथ हिंसा पर भी बात की गई है. वहीं नहीं सर्वोच्च न्यायालय का हवाला देते हुए कहा है कि कुछ राज्य सरकारें धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा को रोकने में असमर्थ रहीं हैं और पर्याप्त काम नहीं कर रही हैं.

अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पिओ द्वारा जारी रिपोर्ट में गृह मंत्रालय के आंकड़ों के हवाले से कहा गया है कि 2015 में 2017 तक भारत में सांप्रदायिक घटनाओं में 9 फीसदी की वृद्धि हुई है, 822 घटनाओं के साथ 111 मौतें हुई और 2017 में 2,384 घायल हुए।

कठुआ मामले का जिक्र

जम्मू-कश्मीर की 8 साल की मुस्लिम लड़की का अपहरण करने, बलात्कार और हत्या करने का उदाहरण देते हुए रिपोर्ट में कहा गया है, ‘धार्मिक अल्पसंख्यकों पर हमलों में कानून प्रवर्तन कर्मियों पर शामिल होने के आरोप थे। 10 जनवरी को जम्मू और कश्मीर पुलिस ने अपहरण, सामूहिक बलात्कार और 8 साल की लड़की की हत्या के मामले में 4 पुलिस कर्मियों सहित 8 लोगों को गिरफ्तार किया। रिपोर्ट में कहा गया है कि पुरुषों ने कथित तौर पर पीड़िता का अपहरण किया, उसे पास के एक मंदिर में ले गए, और उसके खानाबदोश मुस्लिम समुदाय को बाहर निकालने के प्रयास में उसका बलात्कार किया और उसे मार डाला।’

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